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Seth shri prakash chand ji maharaj was born in Rindhana. Father’s name was Shri Badri Prasad Jain and mother’s name was bhulla devi. You carried out your basic education at Gurukul, Panchkula.

श्री प्रकाश चाँद गुरुदेव सैयम की जो है मूरत, वोह नैन धन्य होते देखे जो इनकी सूरत। पिता का नाम श्री बद्री प्रसाद जैन एवं माँ का नाम भुला देवी। आप बचपन से ही एकाग्र तबियत के धनी थे। आप अपने लघु भ्राता श्री राम प्रसाद जी के साथ सदॆव बगलगीर रहे। अध्यन के लिए आप दोनों भ्राता जैनेन्द्र गुरुकुल पंचकुला में भर्ती हुए। जब कभी आपका आगमन अवकाश समय देल्ही चांदनी चौक में होता तो पिता श्री की कपडे की दूकान की, घर की ताली कुंजी संभालते।

लघु वय में हिसाब तथा लेन देन में आपकी तत्परता देख कर कटरे वाले सभी आपको सेठ कहते। लाड प्यार का यह नाम आपका चिर स्थायी शश्वत अलंकरण बन गया। लघु भ्राता का साहचर्य दो हंसो की जोड़ी सा सुशोभित होता। जब आप युवा अवस्था की देहलीज पर आ रहे थे, उस वक़्त पिता श्री का मन वाचस्पति गुरुदेव की चरण शरण वरन के लिए तैयार हो चुका था। जरूरत थी आपकी सहमती की। आपने पिता श्री के मानसिक भाव को ही अपना लक्ष्य बना लिया। पिता पुत्रो की त्रिवेणी ने एक साथ प्रवार्जित मुंडित हो कर 18 जनवरी 1945 के दिन को धन्यता प्रदान की। आप इस संघ के मूल पत्थर है जिनकी पारदर्शिता के प्रतिबिम्ब सभी को हर्षित मुदित कर रहे है। आपने लोक परलोक अलोक आदि के आस्तिक दर्शनों की व्याख्या को भी गणित भाव से परिगणित किया है। आपकी इसी तर्क शील बुद्धि के सभी कायल है। आपके वैज्ञानिक दिमाग को देखकर वाचस्पति गुरुवार कहा करते सेठ अगर तू मुनि न बनता तो विश्व को कुछ ऐसी चीज देता जिसे आज तक वैज्ञानिक नहीं दे पाए है।