श्री अंतगढ़ सूत्र को श्रद्धा से पढ़े या सुने तो चिंता,भय,टोटा.बीमारी,झगड़े,सब शांत हो जाते है ई

यदि पानी को अभिनियंत्रित करके ये भावना भर दी जाए कि ये अमृत ह तो वह जहर को ख़त्म करने वाला बन जाता हैई

माँ-बाप गुरु के लिए जितनी चिंता का हल करेंगे,उतनी संपत्ति हमें मिलेगी ई

जो समझोते के लिए आ जाता है,वह धरती के देवता से कम नही होता I

इनको छोटा मत समझो- ऋण बढे, जख्म बढे, खुजली बढे ,अग्नि बढे, राग-द्वेष कषाय बढे, ये सब बढ़ते है तो अनंत संसार के कारण बनते है I

कम तोलना, माल बदलना, मिलावट करना ये गऊ हत्या के सामान है I

आपको कोई जितना सताएगा, ये निश्चय कर लो कि आपकी ताकत बढ़ती जाएगी I

गरीबी में यदि दान दें और मिल के रहें तो फिर गरीबी थोड़े दिन की होती है I

नमोत्थूनम का पाठ मंगलाचरण है,आत्मा को ख़ुशी देने वाला पाठ है I इससे भगवान के गुणों को नमस्कार है I

सत्य और संयम के पालन से इंसान चमकता है I बढ़ता-बढ़ता देवों से भी ऊँचा चढ़ सकता है I ऐसे सभी सर्वोच्च सदाचार के नियम अपनाने चाहिए ई

बुरा न सोचें,बुरा न बोले, बुरा करे नहीं आचरण, मर्यादा में रहें सभी व्यसनों का करे निराकरण,दृढ़ प्रतिबन्ध लगाएं विरोध में विकार के i

रहे कलुषता और न कटुता,मधुर-मधुर व्यवहार रहे, बच्चों और युवकों में जागृत पुनः धर्म संस्कार हो I ऐसे कदम उठाएं समाज के सुधार के I