जो सकल विश्व कि शांति चाहता है, सबको प्रेम और स्नेह कि आँखों से देखता है, वही सच्चा जैन है I
ज्ञान चेतना कि गंगा बहाने वाला, मधुरता कि जीवित मूर्ति कर्तव्य क्षेत्र का  अविचल वीर योद्धा, वही सच्चा जैन है I
जैन का अर्थ अजेय है, जो मन और इन्द्रियो के विकारो को जीतने वाला, आत्म विजय कि दिशा में सतर्क रहने वाला है, वही सच्चा जैन है I
‘जैनत्व’ और कुछ नहीं, आत्मा की शुद्धि कि स्थिति है I आत्मा को जितना कसा जाये उतना ही जैनत्व का विकास I जैन कोई जाती नहीं, धर्म है I किसी भी देश, पंथ और जाति का कोई भी आत्म विजय के पथ का यात्री, वही जैन I जैन -भूख से कम खता है, बहुत कम बोलता है, व्यर्थ नहीं हँसता है, बड़ो कि आज्ञा मानता है सदा उद्धम-शील रहता है I
जैन गरीबी से नहीं शर्माता,वैभव पाकर नहीं अकड़ता,किसी पर नहीं झुंझलाता,किसी से चल कपट नहीं करता,सत्य के समर्थन में किसी से नहीं डरता I
जैन हृदय से उदार होता है,हित मित मधुर बोलता है,संकट काल में हँसता है,तथा अभ्युद्य में भी नम्रा रहता है I
जैन- गहरा है, अत्यंत गहरा है ; वह छिछला नहीं, छलकने वाला नहीं ; उसके हृदय कि गहराई में शक्ति और शांति का अक्षय भंडार है, धर्म और शौर्य का प्रबल प्रवाह है, श्रद्धा और निर्दोष भक्ति की मधुर झंकार है I
जैन कि गरीबी में संतोष कि छाया है और उसकी अमीरी में गरीबो का हिस्सा है I
जैन बनना साधक के लिए परम सौभाग्य की बात है I
जैनत्व का विकास करना, इसी में मानव जीवन का परम कल्याण है I
                                              ( “जैनत्व की झांकी ” से साभार )